Hindi English and everything in between, feeling lost.

इन्टरनेट पर कुछ भी बोलने की आज़ादी है तो इसलिए हम भी बोल रहे है अंग्रेजी हमारी अच्छी है नहीं सरकारी स्कूल की देन है और आजकल हिंदी भी बिना गूगल इनपुट टूल्स के बिना नहीं लिख पाते, इंग्लिश लिखते है तो ग्रामर खून पी लेती है और हिंदी लिखो तो लोग अनपद समझते है! चलो अनपद ही सही पर यह तो लिखना ही था.. मेरे जैसे काफी लोग होंगे इस देश में जिनको न इंग्लिश अच्छे से आती है और हिंदी में भी मामला गड़बड़ है, हम जैसे लोग वो लोग होते है जो सरकारी और प्राइवेट के बीच के होते है..

बचपन में पांचवी तक पढाई प्राइवेट में करके थोडा अंग्रेज बन जाते है फिर मिडिल क्लास वाली परेशानियों की वजह से सरकारी में जाना पड़ता है, हालाँकि सरकारी स्कूल में पढके भी इंसान बड़ा आदमी बन सकता है पर हम कौन सा आर्यभट के खानदान से थे तो अटक गए प्रॉब्लम एक नहीं दो थी, एक तो हम मिडिल क्लास ऊपर से पढने में भी एवरेज तो गड़बड़ तो होनी ही थी !

अब जो रही रही कसर थी वो ओपन लर्निंग वाले कॉलेज ने पूरी कर दी, लोग कॉलेज में जाके दुनिया से जुड़ते है मेल जोल बढ़ाते है और कुछ लोग अंग्रेजी या हिंदी किसी एक में तो आगे निकल ही जाते है यहाँ हम हिंगिलिश वाली जनरेशन मे फस गए ! हिंदी के ज्ञानी हमे सीरियसली नहीं लेते और अंग्रेजी बोलने वाले लोग हमे हिंदी बोलने वाला समझ कर इग्नोर कर देते है..

अभी जो भी लिखा उसमे भी हिंदी अंग्रेजी सब घुस गया पर क्या करें यही हमारी लैंग्वेज हो गयी है, और मेरे जैसे कई लोग रोज़ इससे दुखी है !

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