Sarkari School ke Launde

इस देश में कई तरह के लड़के पाए जाते है, कुछ शारीफ होते है कुछ हरामी और कुछ सरकारी स्कूल के होते है, जिनका अलग ही प्रकार है ! ये उस सदी से आते है जहा ये इस महान देश के सरकारी स्कूल में पढाई करते है जिसमे पढाई के नाम पर बस खानापूर्ति होती है और जहाँ आखिरी औरत स्कूल में लाइब्रेरी वाली मैडम होती है!

जो लौंडे बचपन से लडकियों के साथ पढ़ते हुए आये होते है उन्हें लडकियो से बात करने में कोई परेशानी नहीं होती और वो खुल के अपनी बात लडकियो से कर पाते है, वही सरकारी स्कूल वाले लौंडे या तो लड़की को लडको की तरह समझते है और या फिर बोहोत शरमाते है जो लडको की तरह समझते है वो न चाहते हुए भी हरामी वाली केटेगरी में फेक दिए जाते है.. और जो बेचारे शरमाते है उन्हें लड़कियां friendzone में डाल देतीं हैं!

सरकारी स्कूल के लौंडे अक्सर लडकियों की इज्ज़त करते है क्युकी उन्हें कभी उनके साथ बात करने का, घुमने फिरने का या पढने का सुख नहीं मिला होता और “इंसान के पास जिसकी कमी होती है उसकी इज्ज़त भी घनी होती है“..

फिर ये लौंडे बारवीं के बाद जब कॉलेज वगेरा में जाते है तब इनको इनकी औकात का पता चलता है ये बचपन से जिस केटेगरी में जी रहे थे उस केटेगरी का तो आगे ज़माना ही नहीं है.. सरकारी स्कूल के लौंडे कॉलेज में भी अपना ग्रुप ढूंड लेते है और दारू और बाकी चीजों के सहारे अपनी कॉलेज लाइफ काट लेते है

किस्मत तो उनकी बुलंद होती है जिन्हें कॉलेज में गर्लफ्रेंड मिल जाती है और 3 या 4 साल चोल मोल करके काट लेते हैं…

ये तो थी लडकियों की बात अब आगे पढाई की बात करते हैं,

पढने में तो ठीक ठाक ही होते है पर अंग्रेजी में लगभग सभी पोलिओग्रस्त होते है..

इसके लिए  पढ़े : अंग्रेजी और हिंदी के बीच

ये आज से 8-10 साल पहले की बात कर रहा हूँ! हो सकता है आजकल के सरकारी स्कूल के लौंडो ने तररकी कर ली हो, smartphone और फेसबुक के ज़माने में कुछ भी हो सकता है!

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